Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 7, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
साधुसंगमसच्छास्त्रैः संसारार्णवतारकः ।
दृश्यते परमात्मा यः स ब्रह्मन्वद कीदृशः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यानी उसका संसारकोटि में समावेश है या आत्मकोटि में ? यह अर्थ है ।
ब्रह्मन् यदि जीव का संसारकोटि में ही समावेश है, तो उसका जो संसाररूपी सागर से
तारण करनेवाला है ओर जिसका साधुसमागम ओर शास्त्र के अभ्यास से साक्षात्कार होता है,
वह कैसा है ? उसे आप मुझसे कहिए । सागर को ही सागर से कोई तार नहीं सकता, इसलिए
जीव का संसारित्वकथन व्याहत है