Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 7, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
सद्रूपं परमात्मेति कथं नाम हि बुध्यते ।
इयतोऽस्य जगन्नाम्नो दृश्यस्यासंभवः कथम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो वस्तु प्रमाणो द्वारा जैसे जानी जाती है उसकी वैसी ही सत्ता होती है, अन्य रूपसे
नहीं ब्रह्म तो प्रमाणों द्वारा जाना नहीं जाता, अतः वह सद्रूप है, यह निश्चय कैसे किया जा
सकता है ओर जगत् प्रमाणों द्वारा सत्-रूप प्रतीत होता है, वह असत् है, यह निश्चय कैसे
किया जा सकता है 2 इस प्रकार श्रीरामचन्द्रजी शंका करते है ।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, परमात्मा सत् है, यह कैसे प्रतीत हो ओर इतना विशाल
तथा विविध प्रमाणो द्वारा सिद्ध इस जगत्-नामक दुश्यका असंभव कैसे प्रतीत हो ?