Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 70, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
ग्रासार्थं सूचितां याता सैवास्था नोपयुज्यते ।
विचारितं तया नैतदहो मौर्ख्यविजृम्भितम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अब सुखोपयोगी न होने से उस कर्कटी नामक राक्षसी के तपस्याफलका उपहास करते हैं ।
वह कर्कटी जगत् के प्राणियों को निगलने के लिए सूचीरूपता को प्राप्त हुई, उसका जगत्
को निगलने का वह आदर ही उपयुक्त नहीं हुआ, क्योकि सूचिकावस्था में जब उदर ही नहीं
रहा तब निगलती कैसे ? उसने इस बात का विचार ही नहीं किया, अहो यह उसकी मूर्खता की
पराकाष्ठा ही है