Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 70, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
कज्जलाम्भोदसंकल्कलतेव पवनाहृता ।
सूक्ष्मरन्ध्रेक्षणस्वच्छदृष्टज्योतिःकनीनिका ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
वह पवन से उड़ाई गई काजल के मेघ के
पिण्ड की लेखा के समान थी, उसके शरीर के अनुरूप छोटे मस्तक में अत्यन्त छोटे-छोटे
सुराखों में स्थित नेत्रों की स्वच्छ ज्योतिरूपी कनीनिका विराजमान थी