Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verses 11–12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verses 11–12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 11,12
संस्कृत श्लोक
स्वको देहः परित्यक्तो मूढचेतनया मया ।
काचबुद्ध्या विमूढेन हस्ताच्चिन्तामणिर्यथा ॥ ११ ॥
आपतद्धि मनो मोहं पूर्वमापत्प्रयच्छति ।
पश्चादनर्थविस्ताररूपेण परिजृम्भते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं बड़ी
मन्दबुद्धि हूँ, जैसे कोई मूढ़ पुरुष काँच समझकर चिन्तामणि को हाथ से छोड़ दे, वैसे ही मैंने
अपना शरीर छोड़ दिया। मोह को प्राप्त होता हुआ मन पहले दुर्बुद्धिको आश्रय देता है, फिर
स्वयं ही अनर्थो की परम्परारूपसे विस्तार को प्राप्त होता है