Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अतः कियन्तं नो जाने कालमावलितापदम् ।
मयापच्छ्वभ्रगर्तेषु लुठितव्यं हतेहया ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए कितने समय
तक आपत्तियों से परिपूर्ण होकर मुझ मन्दभागिनी को आपत्तिरूपी गड़ढ़ों में पड़ा रहना
पड़ेगा, यह मैं नहीं जानती