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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

स्थिताया अज्ञताम्भोधौ क्व ममाभ्युदयो भवेत् । अन्धस्योदेति प्राकाश्यं नखद्योतानुसेविनः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे कि तुमको स्वयं अपना उद्धार करना चाहिए, तो इस पर कहती हैं। अज्ञानसागर में डूबी हुई मेरा उद्धार कहाँ हो सकता है ? खद्योत (जुगनूँ) का सेवन करनेवाले अन्धे पुरुष को पदार्थों का दर्शन कदापि नहीं होता