Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

मयैव कुतपोवह्नौ तदन्यं भासुरं वपुः । भस्मत्वं कनकेनेव सूचित्वमुररीकृतम् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सोना अग्नि में अपने देदीप्यमान स्वरूप को भस्म बना देता हे, वैसे ही मैने ही कुतपरूपी अग्नि में अपने उस श्रेष्ठ प्राचीन शरीर को भस्म कर दिया ओर सूचिता को स्वीकार किया