Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
हा महोदर विन्ध्याद्रिसनीहारगुहोपम ।
अद्य नान्तं करोषि त्वं कथं सिंहेन हस्तिनाम् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
कुहरे से पूर्ण विन्ध्याचल की गुफा के
सदृश हे मेरे विशाल उदर, आज तुम सिंह के सदृश अपने आविर्भाव से तुम्हारे वियोग से
उत्पन्न हुई हाथी के सदुश व्यथाओं का क्यों अन्त नहीं करते हो ?