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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

हा भुजौ भरनिर्भग्नशिखरौ शशभृन्नखैः । पुरोडाशधिया चन्द्रं कथमद्य न बाधतः ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

अपने भार से पर्वत के शिरों को तोड़फोड़ देनेवाली हे मेरी भुजाओं ! चन्द्रमारूपी उज्ज्वल नखों से इस चन्द्रमा को देवभाग पुरोडाश समझकर तुम क्यों नहीं पीडित करते ?