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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

हा मुखेन्दो तपसि किं नाद्य त्वं मम रश्मिभिः । कल्पान्तदावसंशान्तचन्द्रबिम्बमनोहर ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रलयाग्नि से दग्ध चन्द्रबिम्ब के समान मनोहर हे मेरे मुखचन्द्र, तुम आज अपनी किरणों से क्यों नहीं तप रहे हो ?