Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verses 40–41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verses 40–41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 40,41

संस्कृत श्लोक

हा हा हस्तौ महाकारौ तावद्य क्व गतौ मम । संपन्नास्मि महासूचिर्मक्षिकाखुरदोलिता ॥ ४० ॥ हा भगोग्रकरञ्जाढ्यसत्कन्दश्वभ्रशोभन । विन्ध्याद्वरेण्यविपुलनितम्बामलबिम्बक ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

वे बड़े मेरे हाथ कहाँ चले गये, इसका मुझे बड़ा पश्चात्ताप है, मैं आज मक्खियों के पैरों से हिलाई जानेवाली महासूची बन गई हूँ। उग्र करंज से युक्त, जिसमें अनेक कन्द हो, ऐसे गर्तं के समान सुन्दर हे मूत्रद्वार तथा विन्ध्यारण्य के समान विशाल हे नितम्बम्बि ! मैं तुम्हारे लिए शोक करती हूँ