Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 71, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
क्वाकारोऽम्बरपूरकः क्व च नवं तुच्छात्मसूचीवपू ।
रोदोरन्ध्रसमं क्व वास्य कुहरं क्वेदं च सूचीमुखम् ।
क्व ग्रासो बहुमांसभारबहुलः क्वाब्बिन्दुना भोजनं ।
सूक्ष्मास्म्येतदहो मयैव रचितं स्वात्मक्षये नाटकम् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
कहाँ वह मेरा गगनचुम्बी आकार और कहाँ यह अत्यन्त सूक्ष्म नवीन सूचीरूपी
शरीर, कहाँ उसका द्युलोक और पृथ्वी के मध्यवर्ती रन्प्र के तुल्य वह मुखरूपी गर्तं और
कहाँ यह सूचीका मुख, कहाँ बहुत से मांस के भार से विशाल पूर्व का मेरा ग्रास और कहाँ
आज जल के बिन्दु से भोजन ? मैं अत्यन्त सूक्ष्म हो गई हूँ, अहो यह सब आत्मक्षय के
लिए नाटक स्वयं मैंने अपने आप ही किया है