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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 72, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 72, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

मुखरन्ध्रविनिष्क्रान्ता तस्या भास्करदीधितिः । सखी बभूव सूच्याभा पश्चाद्भागैकरक्षिणी ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

सूचिका के छिद्र से निकली हुई धूप भी, सूचिकाकार होने के कारण, उसकी सखी हई, ऐसी उत्प्रेक्षा करते हैं। उसके मुख के छेद से निकली हुई सूर्य की किरण पृष्ठभाग की रक्षा करनेवाली और सूची के समान आकारवाली सखी हुई