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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 72, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 72, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

अरण्ये क्षुभिता संपद्दूरालोकार्थमुत्थिताम् । पुच्छाकोटिस्थितां वातालोलामनुचकार सा ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

उस सूची ने जंगल में मारे भूख के क्षुब्ध हुई अतएव अपने समीप में आनेवाले जंगल के बटोहियों को दूरसे देखने के लिए उठाई हुई गर्दन से युक्त, पुच्छ से तृण, पत्ते आदि के अग्र भाग मेँ स्थित और वायु से भी चंचल होनेवाली एेसी-तृणजलौका का अनुकरण किया