Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 72, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 72, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
कृष्णत्वहिंस्रतातैक्ष्ण्यव्याप्तास्यपवनाशनैः ।
यत्नात्पदं निबध्नन्ती रेण्वणूपलसंकटे ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
ही उसकी स्थिरता सिद्ध हुई