Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 72, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 72, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
सूच्याभिप्रेक्षिते याता मतिं द्रुमलतादयः ।
महातपस्विनीं सूचीं दृष्ट्वा नोत्कण्ठयन्ति के ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार तपस्या कर रही सूची को अपने सामने देखकर पेड़, लता आदि
को भी सद्बुद्धि प्राप्त हो गयी । महातपस्विनी सूची को देख करके किसको तप करने की उत्कंठा
नहीं होगी