Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 72, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 72, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
स्थिरबद्धपदामेनां स्वमनोवृत्तिमुत्थिताम् ।
अनिलं भोजयांचक्रुर्मुखनिर्गतभांकृतैः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तप करने के लिए स्थिर अपनी मनोवृत्ति के समान उत्पन्न हुई उस सूची को
पेड, लता आदि ने अपने फल-फूलों से वासित वायु खिलाया, क्योंकि उसके मुख से झंकार
शब्द निकलता था ओर शब्द के साथ भोजन करना पामर लोगों में प्रसिद्ध है