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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 37

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 73, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 37

संस्कृत श्लोक

सूचीमादाय गृध्रोऽसौ ययौ तच्चिन्तितं गिरिम् । अन्तःसूचिपिशाच्यन्ते नुन्नोऽब्द इव वायुना ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे वायु से प्रेरित मेघ पर्वत को प्राप्त होता है, वैसे ही अपने भीतर प्रविष्ट हुई सूची द्वारा प्रेरित वह गीध सूचीरूपी पिशाची का निवृत्तिकाल उपस्थित होने पर जहाँ जानेका उसने विचार किया था, उस पर्वत में गया