Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 74, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
शान्तसंकोचसूक्ष्मार्थं विकास्यास्यं रजोणुना ।
तयाद्य स्थगितं शीतवाताशननिवृत्तये ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसने शीत और
वायु के निगलने की निवृत्ति के लिए मुख को, जिसके अत्यन्त छोटे छिद्र के संकोच का निवारण
किया जा चुका था, खोलकर धूलिकणों से भर दिया