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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 74, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

छायासूची तापसूची यश्चात्मा स तृतीयया । त्रिकोणं तपसा पूतं वाराणस्या समं कृतम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

उसने अपनी तपस्या से पवित्र हुए परस्पर के मध्यवर्ती त्रिकोणदेशको असी, वरणा और गंगा इन तीनों के मध्य में स्थित वाराणसी के समान पवित्र बना दिया