Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 74, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
सा तामवेक्षते क्षारात्तापादङ्गे निमज्जति ।
संकटे विस्मरत्येव जनो गौरवसत्क्रियाम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
वह छाया सूची को देखती थी और बड़े तीक्ष्ण सूर्य के ताप से उसके अंगों
मेँ मग्न हो जाती थी, यह बात ठीक भी है, लोग संकट के समय गौरवप्रयुक्त सत्कार को
भूल ही जाते हैं