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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 74, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

मध्याह्ने तापभीत्येव विशन्त्या मारुतान्तरम् । अन्यदा गौरवाद्दृष्ट्वा दूरतः प्रेक्षमाणया ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

तो मध्याह्न में क्यो वह उसके मूल में छिप जाती थी ? इस पर कहते हैं । अन्य समय में दूर से गौरव के साथ देख रही वह मध्याह्न के समय तापके भय से मानों सूची के उदर में प्रविष्ट हो जाती थी, अतएव उस समय उसने उसके दर्शन का त्याग किया