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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 75, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 75, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

तपसानेन संकल्पः सफलोऽस्तु तवोत्तमे । पीना भव पुनः शैले हिमकाननराक्षसी ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

फले हुए इस तप से तुम्हारा संकल्प सफल हो, फिर तुम स्थूलशरीर होकर इस पर्वत में हिमालय-वन की राक्षसी होओ