Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 75, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 75, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
भविष्यसि न्यायवृत्तिर्लोके त्वन्यायबाधिका ।
जीवन्मुक्ततया देहे स्वविवेकैकपालिका ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
तुम न्यायवृत्ति होओगी ओर अन्याय
करनेवालों को नष्ट करोगी, जीवन्मुक्त होने के कारण अपने विवेक का एकमात्र पालन
करोगी