Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 75, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 75, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

यथा स्थितेयमस्मीह संतिष्ठेयं तथैव हि । सत्यासत्यकलामेव त्यक्त्वा किमितरेण मे ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे मैं यहाँ पर स्थित हूँ वैसे ही परमार्थरूपा मैं स्थित रहूँ, केवल परमार्थरूप सत्यकला को छोड़कर अन्य पदार्थों से मेरा क्या प्रयोजन है ?