Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 76, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
प्रचलितवलिताञ्जनाचलाभा हिमगिरिपादनिवेशितं सुदेशम् ।
तदनुगतवती निशाचरी सा निशि सुघनान्धतमिस्रमार्गभूमौ ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर रात्रि में, जब कि अत्यन्त निविड अन्धकार
से मार्ग-भूमि व्याप्त थी, जले हुए ओर काजल से लिप्त पर्वत के समान आकारवाली वह
निशाचरी हिमालय पर्वत की तलहटी में स्थित सुन्दर देश में गई