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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 77, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 77, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

तस्मादिमौ मयैवाद्य भोक्तव्यौ भोज्यतां गतौ । अभव्य एव निर्दोषं प्राप्तमर्थमुपेक्षते ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए मेरे भोज्य बने हुए इन दोनों को मैं आज ही खा डालूँगी । अभागा जीव ही हाथ में आये हुए निर्दुष्ट पदार्थ की उपेक्षा करता हे