Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 77, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 77, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
उदारगुणयुक्ता ये विहरन्तीह देहिनः ।
धरातलेन्दवः सङ्गाद्भृशं शीतलयन्ति ते ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जो देही (प्राणी) उदार गुणों से युक्त होकर इस संसार में विहार करते हैं, धरातल के
चन्द्रमारूप वे अपनी संगति से लोगों को अत्यन्त आह्लादित करते हैं