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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 79, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 79, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

अजातावयवः कोऽणुः सहस्रकरलोचनः । को निमेषो महाकल्पः कल्पकोटिशतानि च ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

जिसके अवयव उत्पन्न ही नहीं हुए हैं, ऐसा कौन अणु सैकड़ों हाथ ओर लोचनो से युक्त है ? वह कोन अणु है, जो निमेषमात्र होता हुआ भी महाकल्प और सैकड़ों करोड़ों कल्परूप है ?