Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 79, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 79, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
केनात्माच्छादनाशक्तेनाणुनाच्छादितं जगत् ।
जगल्लये न कस्याणोः सद्भूतमपि जीवति ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने स्वरूप के आच्छादन में असमर्थ
किस अणुसे यह सम्पूर्ण जगत् आच्छादित (व्याप्त) है लय से तिरोहित हुआ भी जगत्
किस अणु की सत्ता से सत्ता को प्राप्त होकर फिर सृष्टिकाल में आविर्भूत होता हे ?