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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 79, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 79, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

बिसतन्तुर्महामेरुर्भो राजन्यदपेक्षया । तस्य कस्योदरे सन्ति मेरुमन्दरकोटयः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राजन्‌, जिसकी दृढता के सामने महामेरु कमलनाल के तन्तु के समान अत्यन्त अदृढ है, अथवा जिसके संकल्प से उक्त तन्तु भी महामेरु के तुल्य हो जाता है, ऐसी किस वस्तु के अन्दर करोड़ों मन्दराचल विद्यमान हैं ?