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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

त्वंताहंतात्मकं सर्वं विनिगीर्यावबोधतः । न त्वं नाहं न सर्वं च सर्वं वा भवति स्वयम् ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

त्वन्ता ओर अहन्तारूप सबका बोध से निगरण कर न तुम हो और न मैं हूँ और न सब है, अथवा वही स्वयं सब कुछ होता है