Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
कल्पक्रियाविलासो हि निमेषः प्रतिभासते ।
बहुयोजनकोटिस्थं मनस्येव महापुरम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
निमेष ही एक कल्प में
जितनी क्रियाएँ होती हैं उन क्रियाओं के विलास से युक्त प्रतीत होता है