Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

निश्चयो य उदेत्यन्तः सत्यात्मा सत्य एव च । हेम्नीव कटकादित्वं स एव चिति राजते ॥ ४४ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्तवृत्ति के अनुसार ही चित्‌ की प्रतीति होती है, वस्तु के स्वभाव के अनुसार नहीं, ऐसा कहते हैं। जो सत्यस्वरूप, सत्य निश्चय चित्तवृत्ति में उदित होता है, वही सुवर्णं मेँ कटक आदि के समान चित्‌ का प्रतिभास हे