Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

दुःखे कालः सुदीर्घो हि सुखे लघुतरः सदा । रात्रिर्द्वादशवर्षाणि हरिश्चन्द्रस्य चोदिता ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

इसमें लोकानुभव और आख्यायिका का उदाहण देते हैं । दुःख में काल दीर्घ प्रतीत होता है और सुख में सदा अतिअल्प प्रतीत होता है, यह सबके अनुभव से सिद्ध है । हरिश्चन्द्र को एक रात बारह वर्षकी-सी लम्बी प्रतीत हुई थी