Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
कृतवान्प्रागिदमहमिति बुद्धावुदेति हि ।
क्षणात्सत्यमसत्यं च दृष्टान्तः स्वप्नविभ्रमः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
एक क्षण में ही मैंने इस कार्य को पहले किया था, यों कालदीर्घता का बुद्धि में स्फुरण
होता है तथा क्षण में ही असत्य में सत्यता और सत्य में असत्यता यानी व्यावहारिक सत्यता
और प्रातिभासिक असत्यता होती है, इसमें दृष्टान्त स्वप्नरूपी भ्रम है