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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

प्रकाशतमसोर्दूरादूरयोः क्षणकल्पयोः । एकचिद्देहयोरेव न भेदोऽस्ति मनागपि ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार और पदार्थ भी नहीं है, क्योकि विरुद्ध पदार्थो मे अधिष्ठानभूत चित्‌ का भेद न होने से भेद नहीं है, ऐसा कहते है । प्रकाश ओर अन्धकार, दूर ओर अदूर, क्षण और कल्प-इनका एकमात्र चित्‌ ही शरीर है, अतः इनमें परस्पर तनिक भी भेद नहीं हे