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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 53

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

अर्कांशुभिः सूक्ष्मतरनिर्माणं यदनामयम् । अस्तितानास्तिते तत्र कल्पादेरिव कैव धीः ॥ ५३ ॥

हिन्दी अर्थ

सूर्य की किरणों से आगे कहे जानेवाले कोचिन आदि का जो सूक्ष्मतर निर्माण निर्विघ्नता से होता है, उस निर्माण में जैसे अस्तिता नास्तिता हैँ, वैसे ही ब्राह्म कल्प आदिरूप जगत्‌ की अस्तिता नास्तिता है, इसलिए उसमें चिद्बुद्धि या चैत्यबुद्धि कैसे यानी उक्त बुद्धिर्यो निर्विषय ही हैं