Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
बीजमन्तस्थवृक्षत्वं नानाऽनाना यथैकदृक् ।
तथाऽसंख्यजगद्ब्रह्म शान्तमाकाशकोशवत् ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
चृक्षात्मबीजवत्* इस दृष्टान्त का विवरण करते हुए (कोऽन्तर्बीजमिवाऽन्तस्थं स्थितः
कृत्वा त्रिकालग: इस प्रश्न का उत्तर कहते है ।
एकरूप बीज पृथकभूत ओर अपृथक्ृभूत अपने भीतर स्थित वृक्षाकार को बनाकर जैसे
स्थित हे, वैसे ही शान्त ब्रह्म भी आकाशकोश के तुल्य असंख्य जगत् की रचना करके
स्थित है