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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

एषोऽणुः परमाकाशः सूक्ष्मत्वादप्यलक्षितः । मनःषष्ठेन्द्रियातीतः स्थितः सर्वात्मकोऽपि सन् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

*कोडणु: तम:प्रकाश: स्यात्‌ इत्यादि प्रश्नों में बार बार प्रयुक्त अणु” शब्द का भी वही अभिप्राय है, जिसे हम पहले कह आये हैं। परम प्रकाशरूपी यह अणु सूक्ष्म होने के कारण चक्षु का अविषय है, सर्वात्मक होता हुआ भी मन और पाँचों इन्द्रियों का अविषय होकर स्थित है, अत: अणु कहलाता है