Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 102
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 102 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 102
संस्कृत श्लोक
द्रुमो भूमौ स्वबीजत्वमिवोदेत्यनुदेत्यपि ।
परं तत्त्वं जगद्भक्त्या जगत्तां स्वोदयेन च ॥ १०२ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ में दृष्टान्त देते हैं ।
जैसे वृक्ष बीजों को उत्पन्न करता हुआ और वृक्षस्वभाव को न हटाता हुआ स्वबीजरूप से
उदित होता है, तदनन्तर भूमि को प्राप्त होता है, वैसे ही परम तत्त्व भी जगद्रूप से उदित होता
है और अपने उदय से जगत्ता को यानी जन्ममरण आदि की कल्पना को प्राप्त होता हे