Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
आदिसर्गे सर्वशक्तिश्चिद्यथैवोदितात्मना ।
तथाशु पश्यत्यखिलं संकल्पे पर्वतः स्वतः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
सृष्टि में भी दूसरे तीसरे पर्वो से स्वतः तत्-तत् सृष्टि हुई यह नियम हे । आशय यह है कि
आदिसर्ग में प्रवृत्त नियति ही अन्दरस्थित मेरु आदि के बाहर प्रदर्शन में हेतु हे