Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
परमाणुतयैवापि चिन्मात्रेणाणुनामुना ।
परिसूक्ष्मतमेनैव विष्वग्विश्वं प्रपूरितम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
किस अणुमात्र से सौ योजन की पृथ्वी पूर्ण हुई है, इस प्रश्न का उत्तर देते हैं।
देशतः परमाणुरूप, वस्तुतः चिन्मात्र अणु ओर कालतः अतिसूक्ष्मतम, इस प्रकार देश,
वस्तु और काल इन तीन प्रकारके परिच्छेदो की कल्पना के भी अवधिभूत इस अणु से सारा
विश्व चारों ओर से परिपूर्ण है