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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

जगन्ति परितिष्ठन्ति परमाणौ चिदात्मनि । प्रतिभासाः प्रवर्तन्ते तत एव हि जागताः ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

किस अणु बीज में वृक्ष के समान सम्पूर्ण जगत्‌ स्थित है, इस प्रश्न का उत्तर देते हैं। चिदात्मरूप परमाणु में सम्पूर्णं जगत्‌ स्थित हैं और उसीसे ही जगत्‌ की प्रतीतिर्यो प्रवृत्त होती हैं