Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
एतद्बहिष्ठमन्तस्थमस्ति शब्दे न वस्तुनि ।
उपदेशाय सत्त्वानां चिद्रूपत्वाज्जगत्त्रये ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि ब्रह्म तो तदेतदृब्रह्मापूर्वणमनपरमननन््तरमबाह्मम्” इस श्रुति के
अनुसार आन्तर-बाह्यभेदशून्यरूप से ज्ञात है अत: उसमें “वह आन्तर चित््चमत्कृतिको
बाह्मप्रपंचरूप से धारण करता है। यह कथन कैसे संगत हो सकता है 2 तो इस पर कहते हैं ।
बहिष्ठत्व और अन्तस्थत्व - ये तीनों जगतों में अधिकारी प्राणियों के उपदेशके लिए
कल्पित हैं और शब्द में ही इनकी स्थिति है, वस्तु में नहीं; क्योकि वस्तु चिदेकस्वरूप है,
उसमें बहिष्ठत्व, अन्तस्थत्व इत्यादि भेद की कल्पनाका सम्भव ही नहीं है