Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
न विना द्रष्टतामस्ति दृश्यसत्ता कथंचन ।
पितृतेव विना पुत्रं द्वितेवैक्यपदं विना ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार परस्पर सापेक्ष कल्यनावाले होने के कारण वे दोनों ही मिथ्या हैं ऐसा कहते हैं ।
जैसे पुत्र के बिना पितृता का संभव नहीं है ओर जैसे ऐक्य के बिना द्वित्व का संभव नहीं है
वैसे ही द्रष्टता के बिना दुश्यता का किसी प्रकार भी सम्भव नहीं है