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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 67

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 67

संस्कृत श्लोक

दृश्यस्य द्रष्ट्टृनिर्माणे जडत्वान्नास्ति शक्तता । कटकस्य तु हैमस्य यथा कनकनिर्मितौ ॥ ६७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सुवर्णमय कटक सुवर्ण के निर्माण में समर्थ नहीं है, वैसे ही दृश्य द्रष्टा के निर्माण में समर्थ नहीं हे, क्योंकि वह जड हे