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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 68

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 68

संस्कृत श्लोक

चेतनादृश्यनिर्माणं चित्करोत्यसदेव सत् । अकारणं मोहहेतुं हेमेव कटकभ्रमम् ॥ ६८ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्‌ चेतन हे, अतएव वह जैसे सुवर्ण कटकभ्रम को उत्पन्न करता है, वैसे ही दृश्यभ्रमका निर्माण करता हे । उक्त दृश्य असत्‌ होता हुआ भी अज्ञानवश सत्‌-सा प्रतीत होता हे । दृश्य अज्ञानमात्रसे उत्पन्न हे, जब तक अज्ञान रहता हे, तब तक उसकी स्थिति रहती हे