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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

शब्दसंवेदनाच्छब्दः शब्दस्य भ्रान्तिदर्शनम् । ततोऽत्र शब्दशब्दार्थदृष्टेर्दूरतरं गतः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

"कः शब्दोऽशब्द एव च“ इत्यादि प्रश्न का समाधान करते है । इसी प्रकार वही शब्दसंवेदन द्वारा शब्द एवं उक्त शब्द भ्रान्तिदर्शनमूलक होने से शब्द नहीं है यानी भ्रान्तिवश उसका शब्दरूप से दर्शन होता है, परमार्थ दृष्टि से वह अशब्द है, अतएव शब्द ओर शब्दार्थकी दृष्टि से वस्तुतः वह बहुत दूर हे